आज पढ़िए Ashwini Sangle Success Story, जिन्होंने ३ साल बिस्तर पर गुजारने और समाज के तानों को सहने के बाद राज्य स्तरीय पुरस्कार जीतकर अपनी एक अलग पहचान बनाई। जानिए कैसे एक छोटे गाँव की लड़की आज महाराष्ट्र की एक जानी-मानी लेखिका और एंकर बनी।
नाशिक की Ashwini Sangle Success Story की कहानी, जिन्होंने 3 साल बिस्तर पर बिताने के बाद पुरस्कार जीतकर एंकरिंग और साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
साधारण परिवार और बड़े सपने – Small Village, Big Dreams – Ashwini Sangle Success Story
मेरा नाम आश्विनी सांगळे है। मेरा जन्म महाराष्ट्र के नाशिक जिले के येवला तालुका के सत्यगांव नामक एक छोटे से गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। मेरा बचपन सादगी में बीता, लेकिन उसी सादगी में बड़े सपने देखने की ताकत भी थी। मेरे माता-पिता ने कड़ी मेहनत करके हमें पाला-पोसा, और उन्हीं से मुझे मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प जैसे मूल्यों की विरासत मिली। बचपन से ही मुझे बोलने और अपने विचार व्यक्त करने का शौक था।
मेरी 5th से 110th तक की पढ़ाई मुखेड (येवला) में हुई। जब मैं 5th Class में थी, तब विंचूर में आयोजित राज्य स्तरीय वक्तृत्व प्रतियोगिता में मैंने 1st Prize प्राप्त किया। वह पल मेरे लिए केवल एक पुरस्कार नहीं था, बल्कि मेरे जीवन की दिशा तय करने वाला turning point था। उसी दिन से मुझे यह एहसास हुआ कि मेरी आवाज ही मेरी पहचान है।
इसके बाद मैंने कई जगहों पर वक्तृत्व प्रतियोगिताओं में भाग लिया। हर प्रतियोगिता ने मुझे कुछ नया सिखाया और हर सफलता ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया। लोगों के सामने खड़े होकर बोलना और उनसे जुड़ना, यही मेरा सपना बन गया।
दोस्ती का अनमोल साथ: कोमल और मेरा सफर – Unbreakable Bonds of Friendship
पांचवीं से दसवीं तक का मेरा सफर उसके बिना अधूरा है। स्कूल के उन दिनों में हम सिर्फ दोस्त नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे का सहारा थे। मेरी हर खुशी में वो शामिल रही, और हर मुश्किल वक्त में भी वो मेरे साथ मजबूती से खड़ी रही। मेरे दिल की हर बात, हर राज, हर सपना, मैं सबसे पहले उसी से साझा करती थी।
कोमल सिर्फ एक दोस्त नहीं है, बल्कि मेरी ज़िंदगी की सच्ची साथी है। कभी मुझे हँसाने वाली, कभी समझाने वाली, और कभी बस चुपचाप सुनने वाली, उसकी मौजूदगी हमेशा मुझे हिम्मत देती रही। ज़िंदगी में ऐसी एक शख्सियत का होना बहुत ज़रूरी होता है, जिसके सामने हम बिना किसी दिखावे के, जैसे हैं वैसे रह सकें। मेरे लिए वो शख्स है कोमल।
संघर्ष की शुरुआत – The Turning Point
11th Classके लिए मैंने कोपरगांव के महिला महाविद्यालय में प्रवेश लिया। लेकिन जीवन हमेशा सीधी राह पर नहीं चलता। इसी दौरान मेरा अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ। लेकिन मैने फिर से कॉलेज सुरू किया! लेकिन ज़िंदगी ने मुझे एक और कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया। मेरे पैरों का ऑपरेशन हुआ और उसके बाद मुझे पूरे तीन साल घर पर ही रहना पड़ा। यह समय मेरे जीवन का सबसे कठिन, सबसे भावनात्मक और सबसे अकेला दौर था।
उन दिनों मुझे ऐसा लगने लगा था जैसे सब कुछ मेरे हाथों से फिसल रहा है। मेरे दोस्त आगे बढ़ रहे थे, उनकी ज़िंदगी आगे जा रही थी और मैं वहीं ठहर गई थी। कई बार मन में हार मान लेने के ख्याल आते थे। मैं खुद से पूछती थी, “अब क्या बचा है?” मुझे सच में ऐसा लगने लगा था जैसे मैं सब कुछ हार चुकी हूँ। लेकिन शायद वही पल था, जहाँ से मेरी असली ज़िंदगी की शुरुआत हुई।
उस शांत और एकांत भरे समय में मैंने खुद से बात करना सीखा। मैंने अपने अंदर की भावनाओं को समझना शुरू किया। मैंने लिखना शुरू किया और शब्दों के जरिए खुद को व्यक्त करने लगी। धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि मैं हारी नहीं हूँ, मैं खुद को खोज रही हूँ।
उन तीन सालों ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। धैर्य, आत्मविश्वास और सबसे ज़रूरी, खुद पर विश्वास रखना। वो समय मेरे लिए ठहराव नहीं था, बल्कि मुझे अंदर से मजबूत बनाने वाला दौर था। अश्विनी जी की यह Ashwini Sangle Success Story हमें जीवन में कभी हार न मानने की सीख देती है।
वापसी और सामाजिक कार्य – The Comeback
मैंने विभिन्न NGO में काम किया और वहीं मुझे अध्यक्ष के रूप में भी नियुक्त किया गया। कई संस्थाओं में सक्रिय रूप से काम किया और मेरे सामाजिक कार्यों को देखकर मुझे कई पुरस्कार मिलने लगे।
स्वास्थ्य में सुधार के बाद मैंने फिर से खड़े होने का फैसला किया। मैंने एंकरिंग और वक्तृत्व को दोबारा शुरू किया। फिर से प्रतियोगिताओं में भाग लिया और एक बार फिर प्रथम स्थान प्राप्त करना शुरू किया। हर सफलता मुझे यही कहती थी “तुम अभी खत्म नहीं हुई हो, तुम्हारा सफर अभी बाकी है।”
Ashwini Sangle Success Story
मैं रुकी थी…
लेकिन हारी नहीं थी।
वक्त मुश्किल था,
लोगों के ताने थे,
शरीर भी साथ नहीं दे रहा था…
लेकिन मेरे अंदर की जिद अभी भी ज़िंदा थी।मैं गिरी…
लेकिन फिर से उठ खड़ी हुई।
मैं खो गई थी…
लेकिन खुद को फिर से ढूंढ लिया।आज मैं जहाँ खड़ी हूँ, वहाँ तक पहुँचना आसान नहीं था
लेकिन हर दर्द, हर संघर्ष ने मुझे बनाया है।
लोगों ने क्या कहा, उससे ज्यादा मायने रखता हैमैंने खुद से क्या कहा।
अब मुझे किसी को कुछ साबित नहीं करना…
मुझे बस खुद के लिए जीतना है।
मैं अपनी कहानी की नायिका हूँ
और अभी बहुत कुछ लिखना बाकी है।करीबी लोग ही छोड़कर चले जाते हैं…
तब समझ आता है, अपना असली कौन है।
साथ देने वाले बहुत मिलते हैं,
पर मुश्किल में साथ छोड़ने वाले भी वही होते हैं।दिल टूटता है…
पर इंसान वहीं से मजबूत बनता है।
क्योंकि जो छोड़कर जाते हैं,
वो हमें सिखा जाते हैं
खुद का सहारा बनना।-Writer Ashwini Sangle
Winning Against All Odds : 3 साल के गैप के बाद 12वीं में मिली बड़ी जीत
इसके बाद मैंने राजापूर महाविद्यालय से 12th पूरी की। उस समय पठान सर ने मुझे जो अवसर दिया, वह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। जब मुझे 3 साल के गैप के बाद कहीं भी 12th में प्रवेश नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने मुझ पर विश्वास करके मुझे प्रवेश दिया। उनके विश्वास पर खरा उतरते हुए मैंने 12th में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह केवल शैक्षणिक सफलता नहीं थी, बल्कि मेरे संघर्ष पर मेरी जीत थी।
तानों को बनाया अपनी ताक़त (Turning Criticism into Motivation)
बुरे वक्त में इंसान को सिर्फ हालात ही नहीं, बल्कि लोगों का असली चेहरा भी देखने को मिलता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसा दौर आया, जब कुछ लोगों ने साथ देने के बजाय ताने मारे, मुझे कम समझा और मेरी परिस्थितियों का मज़ाक उड़ाया।
उन तानों से दिल दुखता था, कभी-कभी खुद पर भी शक होने लगता था। लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि ये ताने मेरी कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी ताकत बन सकते हैं। क्योंकि लोग क्या कहते हैं, ये हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन हम उससे क्या सीखते हैं ये पूरी तरह हमारे हाथ में होता है। आज वही ताने मुझे और मजबूत बना चुके हैं। उन्होंने मुझे रोका नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की हिम्मत दी।
Achievements & Recognition – साहित्य भूषण और विविध पुरस्कारों का सम्मान
मैंने “महासती सत्यगाव: एक कथा” नामक स्वलिखित पुस्तक लिखी और उसे प्रकाशित किया। इसके अलावा मैंने कई मैगज़ीन और एंथोलॉजी भी तैयार कीं। इस पुस्तक के लिए मुझे साहित्य भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मैं कवि सम्मेलन और पुरस्कार समारोहों का भी आयोजन करती रही हूँ। आगे चलकर मैंने BA.LL.B. में प्रवेश लिया और अपने करियर के एक नए अध्याय की शुरुआत की।
मेरे इस B.A.LL.B. के सफर में मुझे कई नए लोग मिले। कुछ लोगों ने मेरा साथ दिल से निभाया, तो कुछ लोगों ने मुझे धोखा देकर अपना असली चेहरा दिखाया। उनकी बुरी व्यवहार से मैंने लोगों को पहचानना सीखा, और ज़िंदगी के अनमोल अनुभव हासिल किए। इसी सफर में मुझे एक सच्ची दोस्त भी मिली—साधना।
वो दिल से बहुत प्यारी है, समझदार है और हर परिस्थिति में मुझे समझने वाली है। ज़िंदगी में ऐसा ही होता है। हज़ारों लोगों के बीच अगर एक सच्चा इंसान मिल जाए, तो वही काफी होता है। क्योंकि कभी-कभी एक सच्चा साथ ही पूरी दुनिया से बढ़कर होता है।
The Journey Continues – यह तो बस शुरुआत है: अभी आसमान छूना बाकी है
आज मैं एक एंकर और लेखिका के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हूँ। मेरी आवाज और मेरे शब्द ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। मेरा जीवन मुझे यह सिखाता है कि कठिनाइयाँ आना निश्चित है, लेकिन उनके सामने हार मानना कोई विकल्प नहीं है। अगर आपके पास दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और खुद पर विश्वास है, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।
आज तक मुझे कुल 96 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं और एंकरिंग के क्षेत्र में मैंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। आज मैं जहाँ भी हूँ, वहाँ तक पहुँचने के लिए मैंने बहुत संघर्ष किया है। लेकिन यह अंत नहीं है यह तो केवल एक नई शुरुआत है। मुझे अभी बहुत कुछ हासिल करना है, समाज के लिए कुछ अच्छा करना है और अपने कर्तृत्व से अपने परिवार का नाम रोशन करना है।
आज मैं जहाँ खड़ी हूँ, वहाँ तक पहुँचने का सफर आसान नहीं था। मैंने दर्द देखा है, रुकना सीखा है, और फिर दोबारा उठकर चलना भी सीखा है। कभी लगा था कि सब खत्म हो गया। लेकिन आज समझ आता है कि वही समय मेरी असली ताकत बन गया।
मैं टूटी नहीं, मैं बनी हूँ अपने संघर्षों से, अपने हौसले से
आज मेरी पहचान सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि मेरी मेहनत, मेरी जिद और मेरे सपनों की कहानी है। मैं एक निवेदिका और लेखिका के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हूँ, और यह तो बस शुरुआत है। आगे का रास्ता अभी लंबा है। लेकिन अब मुझे खुद पर पूरा भरोसा है। मैं रुकने वाली नहीं हूँ, क्योंकि अब मैंने चलना ही नहीं, उड़ना भी सीख लिया है।
रुक गए थे कदम…
लेकिन सपने नहीं रुके थे,चारों ओर अंधेरा था…
पर उम्मीदें बुझी नहीं थीं।
ज़ख्म थे गहरे…
फिर भी मुस्कान खोई नहीं थी,खो गए थे कुछ पल…
पर खुद को भुलाया नहीं था।तानों की छाया में भी
मैंने खड़ा होना सीखा,
दर्द के तूफानों में भी
खुद को गढ़ना सीखा।आज जो कुछ हूँ…
वो मेरे संघर्ष का फल है,
और आगे बढ़ता हर कदम…
मेरी जिद का बल है।ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
ये तो बस शुरुआत है,
क्योंकि मेरे सपनों को
अभी आसमान छूना बाकी है।-Writer Ashwini Sangle
Conclusion
Ashwini Sangle Success Story हमें सिखाती है कि अगर आपके पास अटूट इच्छाशक्ति और खुद पर भरोसा है, तो शारीरिक अक्षमता या समाज के ताने आपको कभी रोक नहीं सकते। यह Ashwini Sangle Success Story केवल एक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उन हज़ारों युवाओं के लिए एक मशाल है जो कठिन समय में हार मान लेते हैं।
आज अश्विनी जी न केवल अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। Ashwini Sangle Success Story हमें याद दिलाती है कि— “जिंदगी में हारना बुरा नहीं है, लेकिन हार मान लेना सबसे बुरा है।”
CareerWale की टीम Ashwini Sangle जी के उज्जवल भविष्य की कामना करती है। हम आशा करते हैं कि Ashwini Sangle जैसे और भी कलाकार भारत के कोने-कोने से निकलकर अपनी कला का लोहा मनवाएंगे।
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